मुख्य शिक्षा अधिकारी मदन सिंह रावत की हठधर्मिता जारी,विषय विशेषज्ञ न आने से रद्द हुआ साक्षात्कार..

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मुख्य शिक्षा अधिकारी मदन सिंह रावत की हठधर्मिता जारी,विषय विशेषज्ञ न आने से रद्द हुआ साक्षात्कार..
जागो ब्यूरो रिपोर्ट:

भ्रष्टाचार के कई मामलों के आरोपी मुख्य शिक्षा अधिकारी पौड़ी मदन सिंह रावत की हठधर्मिता और निरंकुश कार्यशैली की वजह से छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा रहा है,मामला इंटर कॉलेज गड़कोट मांडलू में हिंदी विषय में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति का है,विद्यालय में वर्ष 2012 से हिंदी सहायक अध्यापक का पद रिक्त चल रहा है,2015 में नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति प्रकाशित की गयी,लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा पद हेतु साक्षात्कार करवाने में लापरवाही के चलते तब से अब तक हिन्दी सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति नहीं हो पायी है,मामला जब हाईकोर्ट पहुँचा तो माननीय न्यायालय ने 2019 में शिक्षा विभाग को छात्रहित में तत्काल विद्यालय में नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के आदेश दिये,लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद भी मुख्य शिक्षा अधिकारी पौड़ी मदन सिंह रावत इसमें खास दिलचस्पी दिखाते नजर नही आ रहे हैं,विद्यालय प्रबंधक द्वारा जब न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए जिलाधिकारी पौड़ी को उक्त संबंध में पत्र प्रेषित किया गया तो जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को साक्षात्कार करवाने के आदेश दिये,लेकिन कल वृहस्पतिवार को जब साक्षात्कार हेतु सभी अभ्यर्थी पहुँच गये तो पता चला कि तीन विषय विशेषज्ञों में से सिर्फ एक ही विषय विशेषज्ञ साक्षात्कार लेने पहुँच पाये हैं,जिस कारण साक्षात्कार सम्पन्न नही हो पाया, इस संबंध में जब चयन समिति के अध्यक्ष उत्तम नेगी ने अशासकीय विद्यालय अधिनियम की धारा-37 के बिन्दु-15 में उल्लिखित नियमों का हवाला देते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी रावत से सवाल किया,कि आपने प्रतीक्षा सूची में किसी विषय विशेषज्ञ को क्यों नही रखा?तो मुख्य शिक्षा अधिकारी रावत को नियम का ही पता नहीं था,कि इस तरह का भी कोई नियम है!जो कि शिक्षा विभाग के लिए बड़े शर्म की बात है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी को ही नियुक्ति सम्बंधी नियम नही पता हैं,इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले की शिक्षा व्यवस्था कितनी अंधकारमय है? एक ओर पटल सहायक कोहली ने बताया कि विशेषज्ञों के न आने की सूचना उनको साक्षात्कार के एक दिन पहले ही मिल गयी थी, जबकि मुख्य शिक्षा अधिकारी ने पटल सहायक के जबाब का खंडन ही नही किया बल्कि अशिष्ट भाषा में उल्टा उन्हें फटकार भी लगायी,जिसका वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध है।इस संबंध में जब देहरादून से आये विषय विशेषज्ञ सेमवाल जी से पूछा गया तो उनका कहना था कि उनको साक्षात्कार लेने आने की सूचना महज दो दिन पहले ही व्हाट्सएप्प के माध्यम से मिली थी!उन्होंने भी शिक्षा विभाग की इस तरह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि बेरोजगार युवाओ और वहाँ अध्ययनरत छात्र-छात्राओ के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, साक्षात्कार हेतु आये सभी अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग की गैरजिम्मेदाराना हरकत की कड़ी निंदा की और कहा कि मुख्य शिक्षा अधिकारी ख़ुद ही नही चाहते कि साक्षात्कार हो,आपको बता दें कि विद्यालय के प्रबंधक द्वारा इस सम्बंध में 9 नवम्बर को ही जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया था कि मुख्य शिक्षा अधिकारी ने उन्हें धमकी दी है कि साक्षात्कार कि तिथि तो निर्धारित कर दी जायेगी, लेकिन वो विशेषज्ञों को आने से मना कर देंगे और मजे की बात है कि हुआ भी कुछ ऐसा ही,इससे साबित होता कि मुख्य शिक्षा धिकारी को जिलाधिकारी के आदेश से भी कोई फर्क नहीं पड़ता,बहरहाल विद्यालय प्रबंधक ने इस प्रकरण की शिकायत भी जिलाधिकारी पौड़ी को कर दी है,अब देखना होगा कि जिलाधिकारी पौड़ी मदन सिंह रावत की इस निरंकुशता पर क्या रुख अपनाते हैं?

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