एसडीएम कोटद्वार योगेश मेहरा के ख़िलाफ़ डिसास्टर एक्ट की धाराओं में केस दर्ज करने की तहरीर..

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एसडीएम कोटद्वार योगेश मेहरा के ख़िलाफ़ डिसास्टर एक्ट की धाराओं में केस दर्ज करने की तहरीर..

जागो ब्यूरो रिपोर्ट:

कोटद्वार के एसडीएम योगेश मेहरा महामारी एक्ट की धारा 188 की चपेट में आ सकते हैं,दरअसल बीते रोज पौड़ी जनपद के एसएसपी दलीप सिंह कुँवर के कोटद्वार क्षेत्र के मुआयने के दौरान कोटद्वार के उप जिलाधिकारी और नगर आयुक्त योगेश मेहरा कोटद्वार थाने/पुलिस चेक पोस्ट समेत कई सार्वजनिक स्थानों में बिना मास्क पहने दिखायी दिये हैं,जबकि एसएसपी कुँवर समेत अन्य पुलिस व सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों ने उस वक्त मास्क लगाये हुए थे,इस घटना के फोटो कर्मभूमि टीवी के सम्पादक और राज्य आन्दोलनकारी राजीव गौड़ ने सार्वजनिक करते हुये स्थानीय थाना प्रभारी, सीओ, एएसपी, एसएसपी पौड़ी ,जिलाधिकारी पौड़ी,डीआईजी गढ़वाल,एडीजी लॉ एंड आर्डर और डीजीपी उत्तराखण्ड को मेल द्वारा इस घटना की सूचना देते हुये एसडीएम मेहरा पर आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने की तहरीर दी है,गौड़ का कहना है कि ऐसी ही स्थिति ही में अगर कोई सामान्य नागरिक बिना मास्क पहने सार्वजनिक स्थान पर नजर आता तो पुलिस-प्रशासन उस पर तुरंत ही कानूनी कार्यवाही अमल में ले आता,उन्होंने कहा कि इन्ही हालातों में कई पत्रकार भी इस कानून की चपेट में आ चुके और उनपर मुक़दमे भी हो चुके हैं,ऐसे में एसडीएम और नगर आयुक्त योगेश मेहरा का अपराध तब बड़ा हो जाता है,क्योंकि वह एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी हैं और उन्हें कानून की पूरी जानकारी भी है!लेकिन वह जनपद के एसएसपी के सामने ही कोटद्वार थाने/पुलिस चेक पोस्ट में ही बिना मास्क पहने जेब में हाथ डाले छाती ताने खड़े नजर आते हैं,जिससे साफ़ जाहिर होता है कि उन्हें कानून का बिल्कुल भी ख़ौफ़ नहीं है,राज्य आंदोलनकारी और पत्रकार राजीव गौड़ ने मांग की है कि संविधान में दिये गये समानता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए स्थानीय पुलिस और पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में शीघ्र कानूनी कार्यवाही करें, जिससे जनता में पुलिस -प्रशासन पर कानून की रखवाली करने का विश्वास क़ायम रहे।

इस एक्ट के तहत आती है धारा:-
कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी कानून ( Epidemic Diseases Act, 1897) के तहत लागू किया गया है,इसी कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर लॉकडाउन (Lockdown) में सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जायेगी।

क्या है आईपीसी 188:-
1897 के महामारी कानून (Mahamari Act) के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार / कानून के निर्देशों / नियमों को तोड़ता है, तो उसे आईपीसी (IPC) की धारा 188 के तहत दंडित किया जा सकता है,अगर आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कानूनी रूप से दिये गये आदेशों का उल्लंघन करते हैं या अगर आपको सरकार द्वारा जारी उन निर्देशों की जानकारी है,फिर भी आप उनका उल्लंघन कर रहे हैं, तो भी आपके ऊपर धारा 188 के तहत कानूनी ,कार्यवाही की जा सकती है।

क्या मिल सकती है सजा:-
IPC की धारा 188 के तहत सजा के दो प्रावधान हैं। पहला – अगर आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कानूनी रूप से दिए गए आदेशों का उल्लंघन करते हैं या आपकी किसी हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है, तो आपको कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। वहीं दूसरा अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा,आदि को खतरा होता है, तो आपको कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।एसडीएम कोटद्वार की लापरवाही तब और बड़ी हो जाती है,जब वे सरकार के जिम्मेदार अधिकारी हैं!

कानून के जानकारों के अनुसार उनपर लोक जन सेवक द्वारा सरकारी काम मे लापरवाही की धारा भी लगायी जा सकती है,उधर जब “जागो उत्तराखण्ड” ने इस बारे में जानकारी करनी चाही तो जनपद के एसएसपी कुँवर फ़िलहाल इस मामले से अनभिज्ञता दिखा रहे है,तो एसडीएम मेहरा या तो फ़ोन नहीं उठा रहे हैं या फ़ोन काट दे रहे हैं,शायद उनके पास मीडिया के सवालों के जवाब नहीं हैं!

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