सीएम त्रिवेन्द्र पर सीबीआई जाँच, पुलिस के दामन पर आँच!

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सीएम त्रिवेन्द्र पर सीबीआई जाँच, पुलिस के दामन पर आँच!

हाइकोर्ट ने पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को किया ख़ारिज!

जागो ब्यूरो एक्सक्लूसिव:

देहरादून/ नैनीताल। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार उमेश शर्मा,पर्वतजन के सम्पादक, शिवप्रसाद सेमवाल और क्राइम स्टोरी के सम्पादक राजेश शर्मा को राजद्रोह,ब्लैक मेलिंग आदि के आरोपों को नकारते हुए उन पर दर्ज एफआईआर को खारिज़ करते हुये, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर झारखंड प्रभारी रहते हुए अमरेंद्र चौहान नाम के व्यक्ति को गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए कथित रूप से ली गयी रिश्वत के मामले में सीबीआई देहरादून को एफआईआर दर्ज कर सीबीआई इंक्वायरी के आदेश दिए हैं।

ज्ञात हो कि तीनों पत्रकार इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर मुख़्यमंत्री त्रिवेन्द्र द्वारा कथित रूप से किये गये बड़े भ्रष्टाचार को जनता के समक्ष ला रहे थे, जिनके विरुद्ध पुनः एफआईआर के ऊपर आया यह आदेश उत्तराखण्ड सरकार और पुलिस प्रशासन के गाल पर भी एक झन्नाटेदार तमाचा है! आपको याद होगा कि इसी मामले से जुड़ी हुई खबरों को लगातार प्रकाशित करने वाले पर्वतजन के सम्पादक शिव प्रसाद सेमवाल जो कि अब यूकेडी के नेता हैं और क्राइमस्टोरी अखबार के संपादक राजेश शर्मा को पुलिस द्वारा अपराधियों की तरह देर रात घर से उठा कर गिरफ्तार कर लिया गया था,बाद में दोनों पत्रकारों ने हाईकोर्ट की शरण लेकर अपना बचाव कर लिया था,लेकिन हाई कोर्ट के ताजा ऐतिहासिक आदेश के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है।कि उत्तराखण्ड सरकार, पुलिस का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हुए लगातार पत्रकारों का उत्पीड़न कर रही है! पिछले दिनों जब क्राइम स्टोरी के सम्पादक राजेश शर्मा की अपराधियों की तरह गिरफ्तारी को लेकर पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमण्डल संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले “तीसरी आँख का तहलका” व “पोल खोल” पोर्टल के संपादक सुनील गुप्ता सहित डीआईजी गढ़वाल और एसएसपी देहरादून अरुण मोहन जोशी से मिला,तो इस दौरान पत्रकारों की डीआईजी से वार्तालाप का वीडियो भी बना लिया गया,जिसमें जोशी जोर देकर कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि हमारे पास राजेश शर्मा के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और राजेश शर्मा की गिरफ्तारी जायज है! हाईकोर्ट द्वारा पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को खारिज करने पर अब यह तो साफ साबित हो ही गया है कि डीआईजी जोशी,राजेश शर्मा की गिरफ़्तारी को लेकर साफ झूठ बोलते नजऱ आ रहे हैं! यह मामला अब पुलिस के साथ उत्तराखण्ड सरकार पर भी उल्टा पड़ गया है,क्योंकि हाईकोर्ट द्वारा पत्रकार उमेश शर्मा, शिव प्रसाद सेमवाल और राजेश शर्मा को जिस मामले को लेकर क्लीन चिट सी मिल गयी है,उसी मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई को सीएम त्रिवेन्द्र के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों पर एफआईआर दर्ज कर सीबीआई इंक्वायरी शुरू करने के आदेश दिये हैं,पत्रकारों और डीआईजी के बीच वार्तालाप के वायरल वीडियो में डीआईजी जोशी ऑन कैमरा झूठ बोलते हुए दिखाई देते हैं,अब देखना यह है कि पत्रकारों के उत्पीड़न के मामलों में अगर यह वीडियो एविडेंस हाई कोर्ट में पेश किया जाता है, तो माननीय हाईकोर्ट उत्तराखण्ड पुलिस के खिलाफ किस तरह का रुख अपनाता है,इधर डीआईजी द्वारा झूठ बोलने का वीडियो सामने आने के बाद इस घटनाक्रम में पत्रकारों के उत्पीड़न का मुखर होकर विरोध करने वाले तीसरी आँख का तहलका अख़बार व पोलखोल पोर्टल के सम्पादक सुनील गुप्ता का भी उनसे सम्बंधित पूर्व में कोर्ट द्वारा निर्णीत मामलों की अनावश्यक रूप से दोबारा जाँच करवाकर और बैंक द्वारा पैसे का फ़्रॉड किये जाने के मामले को उनके द्वारा प्रकाशित किये जाने पर उल्टा उन पर ही एफआईआर दर्ज कर पुलिस द्वारा उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया गया है, जिससे एक बार फ़िर साबित होता है कि त्रिवेन्द्र सरकार की सरपरस्ती में उत्तराखण्ड पुलिस पत्रकारों के उत्पीड़न से बाज़ नहीं आ रही है,ऐसे में पत्रकार माननीय हाइकोर्ट से ही एकमात्र न्याय की उम्मीद लगा सकते हैं।

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