क्या सुनील दत्त कोठारी का उत्तराखण्ड के लिये देखा गया स्वप्न साकार होगा?

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क्या सुनील दत्त कोठारी का उत्तराखण्ड के लिये देखा गया स्वप्न साकार होगा?

जागो ब्यूरो रिपोर्ट:

पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल ब्लॉक के अन्तर्गत चेलूसैंण के सुनील कोठारी अपनी विरासत को बचाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं,चौबीस साल सप्लाई चेन योगा स्कूल के जीएम रह चुके सुनील कोठारी ने जब घर आने का फैसला किया,तो फूड सेक्टर में अच्छे पद पर नौकरी छोड़ने पर यह फैसला डरावना सा लगता था,परंतु सुनील ने यह कर दिखाया,जब वह वापस आए तो इस निर्णय से खुश तो नहीं लगते थे,परंतु सपना अपनी जन्म भूमि को संवारने का था,परंतु सपना जब आंखों में हो तो सुख-दुःख तथा अभाव का अहसास नहीं होता। शुरुआत के आठ महीने में तमाम सुविधाओं से मुंह मोड़ते हुए पर्वतीय जीवन में ढलने में ही बीत गये, सिर्फ एक डायरी और पेन ने ही उन्होंने जीवन का यह प्रारूप लिखा!उन्होंने औपचारिक रूप से ग्राम संवर्धन कार्यक्रम करने का विचार किया तथा समिति बनाने का निर्णय लेकर उसकी प्रक्रिया में लग गये,आपका उद्देश्य सिर्फ ग्राम विकास था,इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण समाजसेवी स्थानीय लोगों को लेकर “कोठारी पर्वतीय विकास समिति” का गठन किया इस समिति का मुख्य उद्देश्य बंजर खेतों को आबाद करने से लेकर पैकेजिंग तक था,परंतु पलायन प्रवृत्ति के आगे उनकी एक न चली तथा साथ में काम करने वालों की कमी पग पग पर दिखने लगी,तब आपने फैसला लिया और महिला स्वयं सहायता समूह का निर्माण किया,आज आपके पास अपनी संस्था के स्वयं सहायता समूह हैं जिनमें डेढ़ सौ महिलाएं जुड़ी हुई हैं तथा आजीविका वर्धन कर रही हैं। समिति का मुख्य उद्देश्य तथा मुख्य घटक उत्पादित वस्तु को बाजारीकरण देना भी है,इसके लिए गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम उन्होंने स्वयं चलाया। स्थानीय शादी विवाह में खाना बनाने वालों की कमी का प्रभाव पलायन की वजह से आपको स्पष्ट दिखाई दिया,बाहर से बुलाए गए व्यक्तियों की व्यवस्था पर खर्च को प्रत्येक व्यक्ति वहन नहीं कर पा रहा था इसके लिए आपने एक समूह का निर्माण किया,जिसको आप उत्तराखंड भोजन व्यवस्था समूह के नाम से चलाते हैं। परंतु संपूर्ण काम में सुनील ने महसूस किया कि आजीविका वर्धन में किसी वस्तु के निर्माण उत्पाद के रूप में जानकारी का अभाव स्थानीय लोगों में है,इसी बात को ध्यान में रखते हुए आपने आजीविका वर्धन के लिए अनेक प्रकार के पाठ्यक्रम चलाये जो कि ब्लॉक स्तर पर रजिस्टर्ड समूह के लिए विस्तृत कार्यक्रम बनाकर गांव गांव जाकर स्वयं संचालन कर रहे हैं।सुनील बताते हैं हमारा उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है,अपितु सेवा भाव है,उत्तराखण्ड में वही व्यक्ति वापस आये जो बिना रुके-बिना थके लगातार सेवा दे सकता हो यूके टू यूके,यूके हास्पिटैलिटी इंडिया के द्वारा वस्तुओं का प्रचार प्रसार का कार्यक्रम चलाते हैं,साथ ही साथ जागरूकता के लिए इसके अंतर्गत अन्य प्रोग्राम भी चलाये जाते हैं।सुनील के पूर्वज वैद्य रहे हैं,आज आपके पास छत्तीस हस्तलिखित पुस्तकों का संग्रह है जो लगभग चार सौ साल पुराना बताया जाता है,ये आपको विरासत के रूप में मिला है, इस पर वह अध्ययन करके अनुसंधान कर रहे हैं तथा पाठ्यक्रम बनाकर स्वयं सहायता समूह को जड़ी बूटियों की जानकारी भी दे रहे हैं।निजी स्कूलों में कंप्यूटर में अंग्रेजी के निशुल्क पाठ्यक्रम भी चलाते हैं, तथा विभिन्न मंचों पर गढ़वाली भाषा का प्रचार-प्रसार भी करते हैं, पलायन रोकने की मुहिम में आप सतपुली के सुंदर सिंह चौहान जी के साथ भी जुड़े हुए हैं तथा जागरूकता कार्यक्रम भी चलाते रहते हैं।आप होमस्टे और केव -स्टे के बारे में भी जानकारी तथा उत्तराखण्ड में पर्यटन 6यविकास के बारे में भी जानकारी रखते हैं,उन्होंने अब तक लगभग बयालीस होमस्टे की परेशानियों व स्थापना में विभिन्न स्थानों पर सहायता देते दी है,आजकल आप ग्राम अधिकरण कार्यक्रम जीतू, गाँव शीला डांडा,ब्लॉक द्वारीखाल बारह सालों से उजाड़ गांव पर मॉडल रूप में विकसित करने की योजना पर भी कार्य कर रहे हैं।सुनील बताते हैं कुछ अधिक कदम तो चलना होगा अगर आपको विकास करना है तथा जनभागीदारी को लेकर समाज को दिशा देनी है,यह भागीदारी एक कि नहीं अपितु सभी की होनी चाहिए,जिससे उत्तराखण्ड पलायन मुक्त और रोजगार युक्त हो।

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