अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त कुक्कुट पालन यूनिट संचालक युवा की सरकार से मदद की गुहार..

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अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त कुक्कुट पालन यूनिट संचालक युवा की सरकार से मदद की गुहार..
भाष्कर द्विवेदी जागो ब्यूरो रिपोर्ट:

पौड़ी जनपद की श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विकास खंड खिर्सू के ग्राम मेहलचौरी के युवा योगिन्द्र सिंह ने पिछले साल कोरोनावायरस संकटकाल के बाद मैट्रो शहरों की चकाचौंध को छोड़कर अपने गाँव में ही स्वरोजगार करने का संकल्प लिया,जिसके तहत उन्होंने कुक्कुट पालन व्यवसाय में उतरने का फैसला लिया और सर्वप्रथम अपने व्यक्तिगत आर्थिक संसाधनों से इस व्यवसाय का प्रशिक्षण प्रबंधन और सीखने के बाद उन्होंने अपने गाँव में ही मुर्ग़ी पालन की तरफ कदम बढ़ाए और मुर्गियों को बीमारी होने पर इलाज़ की दवा और चारे की सभी जरूरी चीजों को लाकर इस व्यवसाय में पूर्ण रूप से उतर गये, अपनी अच्छी नौकरी को छोड़ने और पिछले वर्ष अच्छा चल निकले स्वरोजगार के बाद उन्होंने इसे बड़े रूप में बढ़ाया और मुर्गियों की संख्या में बढ़ोतरी की, लेकिन इसी माह जनपद में लगातार दो दिनों की अतिवृष्टि से उनके कुक्कुट पालन यूनिट की दीवारें और पुस्ता जमीन में धंस गया,जिससे पूरी यूनिट में पानी और कीचड़ भर गया और दीवारों पर भी दरारें पड़ गयी,आनन- फानन में योगिन्द्र सिंह ने अपनी 250 मुर्गियों को दूसरे स्थान पर सिफ्ट कर दिया,लेकिन उस जगह पर उचित वैंटिलेशन न होने से मुर्गियों की बीमारी बढ़ने और मुर्गियों के मरने का खतरा भी बढ़ गया है,इस समस्या को देखते हुए युवा काश्तकार ने जनपद पौड़ी के आपदा प्रबंधन विभाग 19 जून को फोन कर शिकायत दर्ज करवायी,जिसका शिकायत क्रमांक-343 है,लेकिन विभाग द्वारा उसकी स्वरोजगार यूनिट को इस आपदा नियमावली में किसी भी तरह की मदद देने से इंकार कर दिया,जिससे स्वरोजगार की तरफ सफलतापूर्वक बढ़ रहे युवा उद्यमी योगिन्द्र सिंह आपदा से सम्बंधित प्रशासनिक नियमावली को लेकर बहुत मायूस व परेशान हैं, हम “जागो उत्तराखंड” की तरफ से जिला प्रशासन से निवेदन करते हैं कि आपदा नियमावली के तहत इस तरह की घटनाओं को भी आर्थिक सहायता की श्रेणी में रखते हुए स्वरोजगार यूनिट को हुए नुकसान का मूल्यांकन करने के बाद युवा को उचित आर्थिक सहायता अविलंब दें,जिससे अन्य युवाओं के लिये स्वरोजगार का प्रेरणाश्रोत युवा अपने स्वरोजगार को आगे बढ़ा अन्य युवकों को भी स्वरोजगार करने हेतु प्रेरित कर सके।

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