केदारनाथ आपदा के बाद बस्तियों की सुरक्षा के नाम पर लगाई गयी सिंचाई विभाग की सुरक्षा दीवारों में करोड़ों का गोलमाल…

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केदारनाथ आपदा के बाद बस्तियों की सुरक्षा के नाम पर लगाई गयी सिंचाई विभाग की सुरक्षा दीवारों में करोड़ों का गोलमाल…
जागो ब्यूरो एक्सक्लूसिव:

जून 2013 में आई केदारनाथ आपदा कई ऐसे जख्म छोड़ गई है,जिनको आज तक नहीं भरा जा सका है,लोगों ने अपने परिजनों को खो दिया, कारोबार चौपट हो गये, घर बह गये,सड़कें और रास्ते टूट गये और न जाने किस किस तरह के जख्म स्थानीय लोगों को यह आपदा दे गयी? गिनती करना मुश्किल है,लेकिन इस आपदा का जो सबसे ज्यादा फायदा उठाया ,वह पुनर्निर्माण करने वाली संस्थाओं ने उठाया,चाहे केदारनाथ पुनर्निर्माण के नाम पर NIM पर सवाल उठे हों या अन्य प्रकार के निर्माण,फायदा निर्माणकारी संस्था के अभियंताओं-ठेकेदारों और राजनेताओं के गठजोड़ ने ही उठाया है,आज हम आपको एक ऐसे घोटाले से रूबरू करवा रहे हैं,जिसके बारे में बहुत ज्यादा जिक्र नहीं हुआ है,जबकि यह प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है,यह है सिंचाई विभाग द्वारा नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा के नाम पर दीवारों का निर्माण करने के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे करना,दरअसल केदारनाथ आपदा के बाद केदारघाटी में गौरीकुंड से लेकर सोनप्रयाग और आगे की बस्तियों को मंदाकिनी नदी से हुयी तबाही और दोबारा आपदा आने की स्थिति में इन बस्तियों को मंदाकिनी नदी के कहर से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा इन बस्तियों के किनारे मंदाकिनी नदी पर बाढ़ सुरक्षा दीवारें लगाने का प्रस्ताव शासन से अनुमोदित करवाया गया ,मोटे तौर पर करीब एक अरब के काम केदारघाटी में बाढ़ सुरक्षा के नाम पर किये गये हैं,इनमें से सोनप्रयाग में ही 50 करोड़ से ज्यादा का काम सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ सुरक्षा के नाम पर किया गया है “जागो उत्तराखण्ड” को सूचना के अधिकार में जो जानकारी प्राप्त हुयी है,उसमें इन बाढ़ सुरक्षा दीवारों के निर्माण के बारे में जो प्राप्त हुयी है,वह हैरतअंगेज है जो निविदाएं प्रकाशित की गई वह प्रथम दृष्ट्या ही संदिग्ध प्रतीत होती है,क्योंकि यह निविदायें हार्ड रॉक कटिंग की है जबकि यदि मंदाकिनी नदी के किनारे हार्ड रॉक उपलब्ध है,तो बाढ़ सुरक्षा दीवार लगाने का वहां पर क्या मतलब है? फिर भी हार्ड रॉक के नाम से निविदाएं आमंत्रित की गयी और करोड़ों के भुगतान भी किए गये हैं,बाद में जो दीवारें मन्दाकिनी नदी के किनारे लगायी गयीं,उनको भी जब “जागो उत्तराखण्ड” ने स्थलीय निरीक्षण में जांचने की कोशिश की,तो वह दीवारें भी नदी की सतह से काफी ऊपर पाई गयीं,जिससे मंदाकिनी के बड़े प्रवाह आने पर इन दीवारों के बह जाने का पूरा अंदेशा है,स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया है के यह दीवारें बेहद लापरवाही से लगायी गई हैं और इनमें बाहर से लीपापोती कर अंदर मलबा भर दिया गया है,जबकि ड्राइंग के अनुसार यह दीवारें आरसीसी द्वारा बनाई जानी थी और इनमें सरिया और सीमेंट का मजबूत गठजोड़ प्रयोग होना था,आरोप यह भी है कि इन दीवारों को लगाने में मंदाकिनी नदी से ही घटिया बालू या मिट्टी को ही मसाले के लिए प्रयोग किया गया है,जिसके वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं,अपनी कारगुजारी को छुपाने के लिए सिंचाई विभाग के ठेकेदारों ने बाद में दीवारों को बुनियाद की तरफ मलबे से ढक दिया है,जिससे यह पता ना चल सके की दीवारों की बुनियाद कितनी गहरी है,सूचना के अधिकार में जो जानकारी “जागो उत्तराखण्ड” को प्राप्त हुयी है,उसमें बड़े घोटाले का अंदेशा है क्योंकि जो बांड और प्रपत्र प्राप्त हुए हैं उसमें एक मुश्त ही करोड़ों के भुगतान करने की बात भी दिखाई पड़ती है,सोनप्रयाग के अलावागौरीकुंड,रामबाड़ा,रामपुर,सीतापुर,अगस्तमुनि और कई इलाकों में इस तरह की दीवारें लगाये जाने की जानकारी प्राप्त हो रही हैं,जिनमें इसी तरह की गुणवत्ता से समझौता कर भ्रष्टाचार करने की शिकायत प्राप्त हो रही है,केदारनाथ विधायक मनोज रावत का कहना है की सिंचाई विभाग का यह घोटाला प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है,लेकिन इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है, “जागो उत्तराखण्ड” आगे की कड़ियों में इस बड़े घोटाले को परत दर परत आपके सामने खोलकर रखेगा,जिससे आपदा के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग के बड़े मामले पर कार्रवाई हो सके,जानकारी यह भी प्राप्त हो रही है की सिंचाई विभाग के अभियंता परोक्ष रूप से इस काम में ठेकेदारी भी कर रहे हैं और उसका कमीशन सरकार में बैठे लोगों तक भी पहुंच रहा है,जिस वजह से सब ने आंख बंद की हुयी है,सिंचाई विभाग के अधिकारियों की हनक का यह आलम है कि वे सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज को भी ज़्यादा तवज्जों नहीं देते और शासन व मुख्यमंत्री कार्यालय से ही सांठगांठ कर सारे कामों को करने की अनुमति ले डालते हैं,केदार घाटी के अलावा सिंचाई विभाग पौड़ी जनपद के कई इलाकों में जरूरत ना होने पर भी कऱोडों की लागत से इस तरह की बाढ़ सुरक्षा दीवारें लगा चुका है,जो सीधा-सीधा ठेकेदार को लाभ पहुँचाने के अलावा किसी औऱ को लाभ पहुंचाती हुयी नहीं दिखायी पड़ती,”जागो उत्तराखण्ड” पौड़ी जनपद के चौबट्टाखाल के संगळाकोटी और कई स्थानों से इस तरह की रिपोर्ट पहले ही आपको दिखा चुका है,लेकिन सरकार इसका संज्ञान ले ऐसा हरगिज़ सम्भव नहीं लगता,ऐसे में क्यों न मान लिया जाये कि सिंचाई विभाग प्रदेश में अरबों का गोलमाल सरकार की ही शह पर ही कर रहा है!

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