देहरादून में सिक्का प्रोजेक्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा, डीएम ने ग्राहक के पैसों की वसूली के लिये बिल्डर जीआर रियल कॉन की कुड़की के दिये आदेश..

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देहरादून में सिक्का प्रोजेक्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा, डीएम ने ग्राहक के पैसों की वसूली के लिये बिल्डर जीआर रियल कॉन की कुड़की के दिये आदेश..

गौरव तिवारी,जागो ब्यूरो रिपोर्ट:

देहरादून में जीआर रियल कॉन बिल्डर द्वारा बनाए जा रहे सिक्का किमाया प्रोजेक्ट का आईटी पार्क स्थित कार्यालय आज जिलाधिकारी देहरादून के कुड़की आदेश पर सीज कर दिया गया है,दरअसल जी आर रियल कॉन कंपनी पर आरोप है कि सिक्का प्रोजेक्ट के आयरा टावर के बिना निर्माण शुरू करवाए ही 504 नंबर फ्लैट,जिसे देहरादून के अनिल बलूनी द्वारा बुक कराया गया था इलाहाबाद बैंक के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर वर्ष 2015 में बलूनी के नाम बत्तीस लाख रुपए का लोन स्वीकृत कराया गया,जोकि कंस्ट्रक्शन लिंक प्लान के आधार पर स्वीकृत लोन था,जी आर रियल कौन ने अलाहाबाद बैंक के साथ मिलकर बिना सिक्का प्रोजेक्ट की आयरा टावर का निर्माण प्रारंभ किए ही शुरू में ही लोन अमाउंट का सत्तर फ़ीसदी अर्थात बीस लाख पचास हजार अपने नाम आहरण करवा लिया और उसके एक महीने बाद ही करीब सात लाख पचास हजार की दूसरी क़िस्त भी दोबारा आहरण कर ली, इस तरह बलूनी को स्वीकृत बत्तीस लाख के लोन में से करीब अट्ठाइस लाख का लोन सिक्का प्रोजेक्ट को बना रही जी आर रियल कॉन कंपनी के खाते में जमा हो चुका है,आपकी जानकारी के लिए बता दें की सी एल पी प्लान (कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान) में निर्माण की स्थिति के अनुसार ही लोन की क़िस्त निर्गत होती है,लेकिन इलाहाबाद बैंक के साथ मिलीभगत कर जी आर रियल कॉन कंपनी ने बिना टावर का निर्माण शुरू करवाया ही इतना बड़ा अमाउंट आहरण कर लिया, इसका साफ मतलब है इलाहाबाद बैंक द्वारा न तो साइड इंस्पेक्शन किया गया और ना उसकी वीडियो या फोटोग्राफी की गयी, दूसरी ओर ग्राहक अनिल बलूनी ने 2015 से अब तक ₹35000 प्रति माह ईएमआई के हिसाब से ब्याज सहित करीब 51 लाख रुपए जी आर रियल कॉन को दे दिए हैं, दरअसल 2017 में जब बलूनी को अपने 504 नंबर प्लेट कहीं बनता नजर नहीं आया तो पहले तो उन्होंने प्रोजेक्ट के बारे में कम्पनी से बारम्बार जानकारी हासिल करने की कोशिश की ,लेकिन बार बार टालमटोल करने पर उन्होंने 2019 में जी आर रियल कॉन के खिलाफ रेरा में एक मुकदमा फाइल किया जिसपर रेरा के आदेश पर पीडब्ल्यूडी और एमडीडीए की एक टीम बनाई गयी,जिसे धरातल पर प्रोजेक्ट की जांच करनी थी,कि वह कहां पर बन रहा है? टीम द्वारा जांच करने पर प्रोजेक्ट की आयरा टावर का निर्माण कहीं भी नजर नहीं आया,इसके बाद रेरा के आदेश पर तहसील देहरादून द्वारा जी आर रियल कॉन के खिलाफ ग्राहक अनिल बलूनी के 51 लाख रुपए वापस करने के लिए आरसी काटी गयी और नवंबर माह में जी आर रियल कॉन को 45 दिन के अंदर अनिल बलूनी के 51 लाख वापस करने का आदेश दिया गया,लेकिन 22 जनवरी तक भी जी आर रियल कॉन ने इस आदेश का पालन नहीं किया,जिसके बाद अनिल बलूनी ने जिला अधिकारी देहरादून सी रविशंकर के यहां इस संबंध में अपील दायर की, जिस पर जिला अधिकारी ने जी आर रियल कॉन के खिलाफ कुर्की आदेश जारी कर दिए, यह आदेश 25 जनवरी को किए गए थे और आज अठाईस जनवरी को तहसील की टीम ने मौके पर जाकर जी आर रियल कॉन के सिक्का किमाया प्रोजेक्ट का कार्यालय सीज कर दिया और अभी भी अनिल बलूनी के 51 लाख वसूल करने के लिए कुर्की की कार्रवाई जारी है,जानकारी प्राप्त हुई है की जीआर रियल कॉन कंपनी दिल्ली के बिल्डर हरविंदर और गुरविंदर सिक्का की है और इस तरह का फर्जीवाड़ा इलाहबाद बैंक और कंपनी की मिलीभगत से चल रहा था हैरानी की बात यह भी है कि जिस रेरा ने जीआर रियल कॉन के इस प्रोजेक्ट के कार्यालय को सीज और कुड़की की कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं,उन्होंने कुछ समय पूर्व ही यहां से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर राजपुर रोड पर जी आर रियल कॉन के एक नये प्रोजेक्ट सिक्का किंग्सटन को भी स्वीकृत कर दिया है और उसके नाम पर भी फ्लैट बुकिंग के नाम पर भी ग्राहकों से पैसा लेने की का काम शुरू हो गया है,उधर अनिल बलूनी ने इलाहाबाद बैंक से भी सूचना के अधिकार में जानकारी हासिल करने की कोशिश की गयी कि आखिर किस तरह से बैंक ने सी एल पी प्रोजेक्ट को बिना साइट वेरिफिकेशन के पास कर दिया,जिस पर इलाहाबाद बैंक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है,अनिल बलूनी का कहना है कि इलाहाबाद बैंक के तत्कालीन मैनेजर अरुण गोयल और जी आर रियल कॉन कंपनी के गठजोड़ से उन्हें ठगा गया है और इस संबंध में वे कोर्ट में ब्रीच आफ ट्रस्ट और ठगी का एक मुकदमा राष्ट्रीयकृत इलाहाबाद बैंक के खिलाफ भी करेंगे,लेकिन यह मामला उन सब लोगों के लिये सबक है,जो देहरादून में फ्लैट लेने के लिये इच्छुक हैं, जो केवल कागजों के आधार पर ही फ्लैट बुक करा कर लोन ले लेते हैं और प्रोजेक्ट का स्थलीय मुआयना नहीं करते, देहरादून में इस तरह के अन्य प्रोजेक्ट भी चल रहे हैंजिनमें एमडीडीए द्वारा पास किए गए नक्शे से अलग हटके निर्माण किया गया है या एमडीडीए के मानकों की अनदेखी भी की गयी है और फ्लैटों का निर्माण ऐसी जगह करवाया गया है,जहां पर यह फ्लैट ग्राहकों की जान की आफत भी बन सकते हैं,इस तरह का एक मामला जो कि पैसिफिक गोल्फ स्टेट के फ्लैट्स का था,पूर्व में ही “जागो उत्तराखण्ड” आपके समक्ष रख चुका है, “जागो उत्तराखण्ड”जनसामान्य को आगाह करता है कि देहरादून में किसी भी कंपनी का फ्लैट बुक कराने से पहले बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड और कागजों की पड़ताल के साथ-साथ प्रोजेक्ट का स्थलीय मुआयना भी कर लें,जिससे बाद में उसे पछताना न पड़े,क्योंकि कोई भी ग्राहक अपने जीवन की सारी पूंजी लगाकर मकान या फ्लैट बुक कराता है और अगर उसका पैसा अनिल बलूनी जैसा फंस जाये तो ये उसके लिए जीने मरने की स्थिति होती है।

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