Thousands of green trees cut down courtesy forest departmnt in forest minister Harak singh’s constituency area

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वन मंत्री हरक सिंह रावत की विधानसभा कोटद्वार के अन्तर्गत लैंसडाउन वन प्रभाग में राजनैतिक संरक्षण के चलते हजारों हरे पेड़ों का कटान जारी…

उत्तराखण्ड के वन मंत्री हरक सिंह रावत की विधानसभा कोटद्वार के अन्तर्गत लैन्सडाउन वन प्रभाग में बेहिसाब हरे चीड़, खैर, तुन आदि पेड़ों के कटान की अनुमति दी जा रही है, जिसका चार्ज हरिद्वार में एसडीओ के रूप में तैनात सन्तराम को लैन्सडाउन वन प्रभाग का डीएफओ बनाकर दिया गया है, यह भी जानकारी प्राप्त हुयी है कि सन्तराम को एसडीओ से सीधे डीएफओ बनाने में भी राजनैतिक संरक्षण के चलते विभागीय नियमों को ताक पर रखा गया है और सन्तराम को खासतौर पर लकड़ी कटान की फाइलें स्वीकृत करने के लिये कोटद्वार लाया गया है, इससे पहले इस वन प्रभाग में ईमानदार अफसर मयंक शेखर झा डीएफओ के रूप में तैनात थे और उन्होने हरे पेड़ों के कटान पर रोक लगायी हुयी थी, उनकी मौजूदगी में हरे पेड़ों का कटान सम्भव नहीं था, इसीलिये सन्तराम को इस वन प्रभाग में लाया गया, नवम्बर 2017 में पदभार ग्रहण करने के बाद से ही वे विवादों में हैं, दिसम्बर माह में “जागो उत्तराखण्ड” के कैमरे पर डीएफओ सन्तराम यह कहते हुए कैद हुए थे, कि उन्होंने कोटद्वार की भाजपा नेत्री ममता थपलियाल देवरानी के पिता को मंत्री जी के इशारे पर हरे पेड़ों के कटान की अनुमति दी है, शिवालिक रेंज की तत्कालीन वन संरक्षक मीनाक्षी जोशी ने सन्तराम को नियमविरुद्ध भारी मात्रा में हरे स्वस्थ पेड़ों के कटान की अनुमति देने का दोषी पाते हुए, पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी थी और मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए थे , तब 283 हरे स्वस्थ चीड़ के पेडों को वन माफियाओं द्वारा बैखौफ होकर काटा गया था, बाद में प्रमुख मुख्य वन संरक्षक उत्तराखण्ड जय राज ने भी हरे पेडों के कटान की अनुमति न देने के सम्बन्ध में सन्तराम को चेताया था, लेकिन सारे आदेशो को दरकिनार करते हुए अब फिर से सन्तराम ने हरे स्वस्थ चीड,खैर और अन्य प्रजातियों के पेड़ों पर आरियाँ चलवानी शुरू कर दी है “जागो उत्तराखण्ड” जब कल शाम को लैंसडाउन वन प्रभाग में विभिन्न स्थानों पर अवैध कटान की कवरेज कर के लौट रहा था, तो दुगड्डा के पास हरे पेड़ों से लदा एक ट्रक दिखाइ दिया, लकड़ी की इन डाटों पर नम्बरिंग भी नहीं थी, ड्राइवर से पूछे जाने पर वह लकड़ी की निकासी का कोई भी कागजात दिखाने पर असफल रहा, जिसके बाद डीएफओ सन्तराम को उक्त जानकारी दी गयी और साथ ही अपनी सुरक्षा के लिये कोटद्वार के एडिशनल एसपी वर्मा को पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने हेतु सूचित किया गया कुछ समय बाद ही दुगड्डा चौकी और लैंसडाउन के थानाध्यक्ष मौके पर पहुंच गये, लेकिन वन विभाग का कोई भी अधिकारी एक घण्टे से अधिक समय तक मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके बाद यह सूचना उत्तराखण्ड के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक जय राज को वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के बारे में जानकारी देने पर दुगड्डा रेंज के रेंजर किशोर नौटियाल मौके पर पहुंचे लेकिन ट्रक का ड्राइवर लकड़ी की निकासी के कागजात उनको भी नहीं दिखा पाया, धीरे धीरे वहां पर वन तस्करों की गाड़ियां पहुंचने लगी जिसमें कोटद्वार की पूर्व महिला भाजपा जिलाध्यक्ष ममता थपलियाल देवरानी के पिता और भाई शोभित थपलियाल शामिल थे, ये लोग “जागो उत्तराखण्ड” के प्रतिनिधियों को गाली गलौच और ट्रक से कुचलने की धमकी देने लगे, जो कि कैमरे में कैद हो गया, काफी समय बाद लैंसडाउन वन प्रभाग के रेंजर दिनेश चन्द्र घिल्डियाल स्वयं लकड़ी निकासी का रवाना लेकर वहां पहुंचे और लकड़ी निकासी के बारे में पूछे जाने पर कोई भी सन्तोषजनक जवाब नहीं दे पाये, जिससे स्पष्ट होता है कि यह लकड़ी अवैध तरीके से ले जा रही थी, “जागो उत्तराखण्ड” को लैंसडाउन वन प्रभाग के अधिकारियों और वन माफिया को राजनैतिक संरक्षण और मिली भगत के चलते उक्त मामले में कोई कार्यवाही की उम्मीद नहीं है, लेकिन फिर भी वन विभाग के उत्तराखण्ड मुखिया जय राज की ईमानदार छवि के चलते अभी भी उम्मीद है कि लैंसडाउन वन प्रभाग में हरे पेड़ों के कटान पर यथाशीघ्र रोक लगायी जायेगी।

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