पैसिफिक गोल्फ़ स्टेट के 1800 फ्लैट में रहने वाले 10,000 से ज्यादा लोगों की जान का जिम्मा किसका?

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पैसिफिक गोल्फ़ स्टेट के 1800 फ्लैट में रहने वाले 10,000 से ज्यादा लोगों की जान का जिम्मा किसका?

जागो ब्यूरो एक्सक्लूसिव:

देहरादून में बन रही बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन साइट को मसूरी-देहरादून भवन प्राधिकरण का खूब सहारा मिल रहा है,हालांकि घरेलू मकानों के निर्माण में जरा भी अनियमितता होने पर प्राधिकरण का तत्काल नोटिस आ जाता है,लेकिन गलत तरीके से हो रहे बहुमंजिले भवन निर्माण को रोकने के लिए बनाया गया प्राधिकरण अब खुद ही बड़ी-बड़ी बहुमंजिला इमारतों के नक्से बिना नियम देखे चुटकियो में पास करने वाला प्राधिकरण बन गया है और दूसरी तरफ ज़ीरो टोलरेंस के जुमले में आलम यह है कि बड़े अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी इसमें कोई कार्यवाही नही होती,मामला सहस्त्रधारा रोड़ कुल्हान में बन रहे कि अरबों के प्रोजेक्ट पेसेफिक गोल्फ स्टेट का है जिसके अंदर बन रहे अपार्टमेंट भवन निर्माण मानकों को ठेंगा दिखाते नज़र आते है,नियमों के अनुसार यहाँ पहाड़ो में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12 मीटर भूतल व 3 तल है और मैदानी में 30 मीटर यानी अधिकतम भवनों की ऊँचाई 9 तल है यदि मैदानी क्षेत्र में 18 मीटर रोड हो तभी आप अधिकतम ऊंचाई 9 मंजिल नक्से पास करवा सकते है। मगर वहीं इन सभी नियमों को ताक में रखकर पेसेफिक गोल्फ के अंदर 10 से 11 मंजिल इमारत खड़ी ढाल पर तैयार हो रहे है जबकि नियमों के अनुसार 30 डिग्री के ढाल से ऊपर भवन निर्माण नही कर सकते , मगर यंहा लोगों की जान को ताक में रखते हुवे खड़ी ढाल पर ऐसे अपार्टमेंटपर तैयार हो रहे है, जो एक छोटे भूकंप के झटके से कभी भी धरासाई हो सकती है ,जब इसकी शिकायत एमडीडीए के उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव से की गई तो उन्होंने इस मामले को दिखवाने की बात कही है,देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीटूट भी अपनी भूकम्प सम्बन्धी रिपोर्ट में यह कह चुका है कि देहरादून के राजपुर और सहस्त्रधारा वाले इलाक़े भूकम्प की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील हैं,ऐसे में अगर यह मान ले कि

अगर पैसिफिक गोल्फ स्टेट के 1800 फ्लैटस में प्रति फ्लैट औसतन पाँच आदमी भी रहते हैं, तो कर्मचारी और अन्य स्टाफ को मिलाकर लगभग 10000 इन फ्लैट्स में रहेंगे, अगर खुदा न खास्ता वाडिया इंस्टिट्यूट की भूकम्प सम्बन्धी रिपोर्ट के अनुसार कोई बड़ा भूकम्प इस इलाके में आता है तो पैसिफिक गोल्फ़ स्टेट की यह इमारत ताश के पत्तों की तरह डह जायेगी, ऐसे में हजारों लोगों के जान माल का नुकसान होना तय है,क्या मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण इसकी ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार है?

हमारा इन फ्लैट्स के ख़रीदद्दारों को भी सुझाव है कि इन बहुमंजिले फ्लैट्स में लाखों -करोड़ों रुपए लगाने से पहले गंभीरता से विचार कर लें कि इस बहुमंजिले अपार्टमेंट का मानकों और भूगर्भीय रिपोर्ट की अनदेखी कर निर्माण करवाने वाला MDDA कंही निजि स्वार्थ के लिये आपकी जान का सौदा तो नहीं कर रहा?

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